बाड़मेर।



जब हृदय में करुणा, प्रेम और एकत्व की दिव्य चेतना जागृत होती है, तब मानव अपने सीमित स्वार्थों से ऊपर उठकर सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण का सशक्त माध्यम बन जाता है। परोपकार, करुणा और परमार्थ जैसे अलौकिक मूल्यों से प्रकाशमान यह पावन अवसर उस दिव्य अनुभूति का प्रतीक बना, जहाँ “मानव को मानव हो प्यारा, एक-दूजे का बने सहारा” का संदेश केवल शब्दों तक सीमित न रहकर हृदयों में जीवंत हुआ।


‘मानव एकता दिवस’ बाबा गुरबचन सिंह की दिव्य स्मृति में, सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के सान्निध्य में दिल्ली के ग्राउंड नं. 8 में आयोजित हुआ। संत निरंकारी मण्डल बाड़मेर के मीडिया सहायक हितेश तंवर ने बताया कि, इसी कड़ी में रविवार 26 अप्रैल को बाड़मेर में भी मानव एकता दिवस का आयोजन किया गया एवं विशाल रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। 

शिविर का शुभारंभ बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन एवं संत निरंकारी मण्डल बाड़मेर के जॉनल प्रभारी संत शांतिलाल ने फीता काटकर किया। शिविर के दौरान महिलाओं में रक्तदान को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला।शिविर में 192 का रजिस्ट्रेशन किया गया जिसमें 139 यूनिट रक्तदान किया गया। इस दौरान 34 महिलाओं सहित 105 पुरुषों ने रक्तदान किया। इसके साथ ही मानव एकता दिवस समूचे देश की हजारों सत्संग केंद्रो पर श्रद्धा और समर्पण भाव से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और निष्काम सेवा का जीवंत स्वरूप बनकर उभरा। 

संत निरंकारी मण्डल के सचिव जोगिन्दर सुखीजा ने जानकारी देते हुए बताया कि समूचे भारतवर्ष के लगभग 200 स्थानों पर रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन किया गया। जिससे लगभग 40,000 यूनिट रक्त संकलित किया गया, जो निष्काम सेवा, परोपकार और मानवता के प्रति समर्पण की जीवंत अभिव्यक्ति बनकर उभरा। युगप्रवर्तक बाबा गुरबचन सिंह की स्मृति में यह दिवस वर्षभर चलने वाली सेवा-सरिता का शुभारंभ है, जिसके अंतर्गत देशभर में लगभग 705 स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए गए। जो करुणा और एकत्व की भावना को निरंतर सुदृढ़ किया। उल्लेखनीय है कि रक्तदान की यह पावन परंपरा पिछले चार दशकों से निरंतर जारी है। अब तक 9,174 रक्तदान शिविरों के माध्यम से लगभग 15,00,230 यूनिट रक्त संकलित किया जा चुका है, जो मानव सेवा के प्रति निरंकारी मिशन की अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है। मानव एकता दिवस के अवसर पर ब्रांच बाड़मेर में रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ।

जिसमे जिला राजकीय चिकित्सालय के अनुभवी चिकित्सक एवं उनकी टीम ने रक्तदाताओं की समुचित स्वास्थ्य जांच के उपरांत सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से रक्तदान की प्रक्रिया सम्पन्न कराई। शिविर में 139 यूनिट रक्त युनिट संकलित किया गया। संपूर्ण आयोजन के दौरान स्वच्छता, सतर्कता एवं सेवा-भाव का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे यह पहल केवल जीवनदायिनी सेवा तक सीमित न रहकर मानवता, करुणा और उत्तरदायित्व के उच्चतम आदर्श का प्रतीक बनकर उभरी। युगप्रवर्तक बाबा गुरबचन सिंह ने सत्य, सरलता और सद्भावना का मार्ग दिखाते हुए युवाओं को नशामुक्त जीवन अपनाने और ऊर्जा को समाजसेवा में लगाने की प्रेरणा दी। बाबा हरदेव सिंह महाराज ने “रक्त नाड़ियों में बहे, नालियों में नहीं” का संदेश देकर सेवा को जीवन का अनिवार्य अंग बनाया, जिसे सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज निरंतर आगे बढ़ा रही हैं।