शेखावत ने कहा कि उस समय भी उन्होंने यही बात कही थी और आज भी अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने दावा किया कि उस पूरे घटनाक्रम में सचिन पायलट केवल “एक मोहरा” थे, जिनका इस्तेमाल राजनीतिक खेल में किया गया।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि गहलोत अब भी उसी “मोहरे” का इस्तेमाल कर अपने राजनीतिक समीकरण साधना चाहते हैं, इसलिए बार-बार इस मुद्दे को उछाला जा रहा है।
बयानबाजी की शुरुआत कैसे हुई?
यह सियासी विवाद उस समय तेज हुआ जब बीजेपी के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने टोंक में पायलट पर तंज कसते हुए कहा कि “उनकी एक टांग कांग्रेस में है और दूसरी कहीं और।”
इस पर पलटवार करते हुए गहलोत ने कहा कि पायलट की “दोनों टांगें कांग्रेस में हैं” और अब वे पार्टी छोड़कर नहीं जाएंगे। साथ ही उन्होंने मानेसर कांड का जिक्र करते हुए कहा कि “जो लोग हमारे विधायकों को वहां ले गए थे, उनकी मंशा अब पूरी नहीं होगी।”
मानेसर कांड: क्या था पूरा मामला?
जुलाई 2020 में राजस्थान की राजनीति में बड़ा भूचाल आया था, जब सचिन पायलट खेमे के कई विधायक हरियाणा के मानेसर में एक होटल में ठहर गए थे। इसे गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत के रूप में देखा गया।
इस दौरान कांग्रेस में अंदरूनी संघर्ष खुलकर सामने आया और सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे थे।
आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी लड़ाई
उस समय गहलोत खेमे ने गजेंद्र सिंह शेखावत पर कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त की साजिश रचने का आरोप लगाया था। कुछ कथित ऑडियो टेप भी जारी किए गए, जिनमें शेखावत की आवाज होने का दावा किया गया।
इसके बाद शेखावत ने पलटवार करते हुए गहलोत के तत्कालीन ओएसडी लोकेश शर्मा और पुलिस अधिकारियों पर फोन टैपिंग का आरोप लगाया और दिल्ली क्राइम ब्रांच में केस दर्ज कराया। यह मामला अभी भी जांच में है।
बाद में लोकेश शर्मा ने भी बयान देकर कहा कि कथित ऑडियो टेप गहलोत की ओर से दिए गए थे, जिससे इस विवाद ने और तूल पकड़ लिया।
सियासत में फिर गर्माया मानेसर
ताजा बयानबाजी के बाद एक बार फिर मानेसर कांड राजस्थान की राजनीति के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जिससे आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।
