बाड़मेर


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 21 अप्रैल को पचपदरा प्रस्तावित दौरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। सोमवार शाम को भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ बाड़मेर के प्रवास पर पहुँचे। यहां उन्होंने भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर पीएम मोदी के पचपदरा में प्रस्तावित कार्यक्रम को भव्य बनने के लिए चर्चा की। कार्यकर्ताओं को अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में पहुंचकर सफल बनाने का आह्वान किया। इसके साथ ही संगठन के पदाधिकारी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई।



मीडिया से बातचीत में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने बताया कि 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पचपदरा रिफाइनरी का लोकार्पण करेंगे। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी। रिफाइनरी में हमें बहुत कुछ मिलेगा। करीब 90 हजार कर्मचारी डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रोजगार प्राप्त करेंगे। 

राठौड़ ने पीएम मोदी की कूटनीति की तारीफ करते हुए कहा कि अरब देशों में युद्ध की स्थिति में पीएम नरेंद्र मोदी की कूटनीति की बदौलत जहाजों में तेल और गैस भी आती रही। किसी भी देश की हिम्मत नहीं हुई कि हमारे जहाज को छेड़ें। 



राठौड़ ने कहा कि कॉंग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने रिफाइनरी को लेकर कुछ भी नहीं किया। सीएम और डिप्टी सीएम की लड़ाई में रिफाइनरी का कुछ काम नहीं हुआ। होटलों में बैठे रहे। आपस में लड़ते रहे।


पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के रिफाइनरी को लेकर वसुंधरा को बोलने का हक वाले बयान पर राठौड़ ने पलटवार करते हुए कहा कि (गहलोत) ठीक कह रहे हैं। वसुंधरा राजे हमारी ही नेता है। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत बहुत बड़े आदमी है। तीन बार के सीएम है। मैं उनकी व्यक्तिगत रूप से इज्जत करता हूं।

उन्होंने कहा कि गहलोत के रिफाइनरी में एमओयू में 3736 करोड़ रुपए प्रति वर्ष बिना ब्याज के 15 साल तक देना तय हुआ है। जबकि हमारी सरकार ने उसी कंपनी से हिस्सेदारी में एमओयू किया। राठौड़ ने कहा कि अगर मेरी बात गलत है तो मैं एबीसीडी शुरू कर दूंगा। फर्क नहीं आए तो उनको बोल देना।


पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट के चुनाव नहीं कराने के बयान पर मदन राठौड़ ने कहा कि चुनाव करवाना निर्वाचन आयोग का काम है। चुनाव आयोग जब चुनाव करने की घोषणा कर देंगे। तब हमें चुनाव लड़ने के लिए मैदान में आना ही होगा। हमारे खिसकाने से नहीं खिसकता है। सरकार की मंशा चलती नहीं है। निर्वाचन आयोग तय करता है।