बाड़मेर 

ऑयल फील्ड में हरित ऊर्जा की एंट्री, 25 मेगावॉट परियोजना से 20% बिजली अब रिन्यूएबल स्रोतों से , 153 मिलियन यूनिट ग्रीन पावर का उत्पादन


देश के तेल और गैस क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केयर्न ऑयल एंड गैस ने बाड़मेर स्थित अपने ऑयल फील्ड में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग शुरू कर दिया है। इस पहल के तहत कंपनी अब अपने कुल बिजली उपयोग का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ स्रोतों से प्राप्त करेगी।

इस परियोजना के लिए कंपनी ने सेरेंटिका रिन्यूएबल्स (Serentica Renewables) के साथ करार किया है, जिसके तहत 25 मेगावाट (MW) रिन्यूएबल हाइब्रिड पावर की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। यह ऊर्जा कर्नाटक के गडग स्थित संयंत्र से दी जाएगी, जहां सोलर और विंड पावर का संयोजन अपनाया गया है।

कंपनी के अनुसार, इस पहल से हर साल लगभग 115 किलोटन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आएगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह प्रभाव करीब 57.5 लाख पेड़ लगाने के बराबर है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट न केवल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

कंपनी के अनुसार, सोलर और विंड के संयोजन से तैयार यह हाइब्रिड प्रोजेक्ट लगभग 70 प्रतिशत तक का कैपेसिटी यूटिलाइजेशन फैक्टर (CUF) हासिल करेगा, जो पारंपरिक सोलर या विंड प्रोजेक्ट्स की तुलना में काफी अधिक है। उच्च CUF के चलते बिजली उत्पादन ज्यादा स्थिर और निरंतर रहेगा, जिससे केयर्न ऑयल एंड गैस को 24×7 विश्वसनीय ग्रीन पावर सप्लाई मिल सकेगी, जिससे ऑयल फील्ड के संचालन में स्थिरता और दक्षता बढ़ेगी। इस समझौते के तहत हर साल करीब 153 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा का उत्पादन होगा, जिससे पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता घटेगी और लागत नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।

यह कदम कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करते हुए दशक के अंत तक “नेट-जीरो” लक्ष्य हासिल करना चाहती है।

कंपनी का कहना है कि यह साझेदारी केयर्न ऑयल एंड गैस के काम में साफ ऊर्जा जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे यह भी दिखता है कि कंपनी अब पर्यावरण पर ज्यादा ध्यान दे रही है और आगे चलकर नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाना चाहती है।

यह साझेदारी भारत के ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) को भी गति देगी। Serentica Renewables की तकनीकी विशेषज्ञता और बड़े स्तर पर उत्पादन क्षमता इस बदलाव को मजबूती देगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अन्य तेल और गैस कंपनियां भी इसी मॉडल को अपनाएंगी, जिससे पूरे सेक्टर में ग्रीन एनर्जी का दायरा तेजी से बढ़ेगा।

बाड़मेर बना ऊर्जा बदलाव का केंद्र:
राजस्थान का बाड़मेर जिला पहले से ही देश के सबसे बड़े ऑनशोर ऑयल प्रोडक्शन हब के रूप में जाना जाता है। अब यहां ग्रीन एनर्जी के उपयोग से यह क्षेत्र ऊर्जा परिवर्तन के मॉडल के रूप में भी उभर रहा है।

रेगिस्तानी क्षेत्र में सौर और पवन ऊर्जा की अपार संभावनाओं को देखते हुए यह पहल भविष्य में बड़े निवेश और नई परियोजनाओं का रास्ता भी खोल सकती है।