संघर्ष से सुधार तक: जुझारू नेता की बदलती छवि!
राजस्थान की राजनीति में अपनी बेबाक शैली के लिए पहचाने जाने वाले नेता हनुमान बेनीवाल इन दिनों एक नए और सकारात्मक रूप में नजर आ रहे हैं। अक्सर विरोधियों के निशाने पर रहने वाले और कई तरह के आरोपों का सामना करने वाले बेनीवाल ने अब प्रदेश के युवाओं को नशे की दलदल से बाहर निकालने का बीड़ा उठाया है।
विरोधियों को काम से दिया जवाब
राजनीतिक गलियारों में अक्सर विपक्षी नेता हनुमान बेनीवाल पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि उनकी राजनीति युवाओं को गुमराह करती है। यहाँ तक कि उन पर नशे को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए ताकि उनकी छवि को धूमिल किया जा सके। लेकिन हाल के दिनों में बेनीवाल ने हर मंच से जिस तरह नशे के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है, उसने उनके आलोचकों के मुंह बंद कर दिए हैं।
मंच से बेनीवाल की अपील: "नशा छोड़ो, लक्ष्य चुनो"
हाल ही में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बेनीवाल ने बहुत ही भावुक और कड़े शब्दों में युवाओं को चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “आज एमडी, स्मैक, दारू और ऑनलाइन गेमिंग हमारे बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। हर युवा रातों-रात अमीर बनने के चक्कर में गलत रास्ता पकड़ रहा है। पाँच-दस लाख रुपये कमा भी लिए, तो क्या फायदा? पूरी जिंदगी पुलिस के पीछे भागने और छिपने में निकल जाती है।”
उन्होंने परिवार की मर्यादा का जिक्र करते हुए कहा कि जब कोई बच्चा नशे या अपराध में पकड़ा जाता है, तो सबसे ज्यादा अपमान उसके माता-पिता को सहना पड़ता है। समाज में उनकी साख गिर जाती है।
2028 का 'नशा' रगों में दौड़ना चाहिए
बेनीवाल ने युवाओं के भीतर एक नया जोश भरते हुए कहा कि अगर नशा करना ही है, तो जीत का नशा करो। उन्होंने स्पष्ट आह्वान किया कि युवाओं को अब केवल एक ही लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए— '2028 में अपनी सरकार बनाना'। उनका मानना है कि जब सत्ता में युवाओं की भागीदारी होगी, तभी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, माफिया राज खत्म होगा और प्रदेश की माताएं-बहनें सुरक्षित महसूस करेंगी।
बदलती छवि और जनता का समर्थन
एक जुझारू नेता के रूप में संघर्ष करते हुए हनुमान बेनीवाल अब केवल जनहित के मुद्दे ही नहीं उठा रहे, बल्कि सामाजिक बुराइयों पर भी प्रहार कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि बेनीवाल का यह 'सुधारवादी' रुख उनकी छवि को प्रदेश स्तर पर और मजबूत बना रहा है। युवाओं के बीच उनकी पकड़ पहले से ही मजबूत थी, लेकिन अब नशे के खिलाफ इस मुहिम ने उन्हें अभिभावकों और बुजुर्गों का भी चहेता बना दिया है।
वास्तव में, यह देखना सुखद है कि एक जननेता अपनी ऊर्जा को समाज को सही दिशा देने में लगा रहा है। अब देखना यह होगा कि बेनीवाल का यह संकल्प 2028 की सियासी बिसात पर क्या रंग लाता है।
