बाड़मेर मधुकर जन चेतना न्यास के तत्वावधान में भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में रविवार को बाड़मेर के टाउन हॉल में एक भव्य विचार गोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत बहुत ही आध्यात्मिक और राष्ट्रभक्ति के माहौल में हुई, जहाँ बाड़मेर के प्रबुद्ध नागरिकों ने बाबा साहेब के संवैधानिक और सामाजिक योगदान पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में पूज्य श्री श्री 1008 श्री शंभूनाथ जी महाराज (मठाधीश, चंचल प्राग मठ) का पावन सान्निध्य रहा। महाराज ने अपने आशीर्वचन में उपस्थित जनसमूह को प्रेरित करते हुए कहा कि बाबा साहेब के विचार केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि समाज बाबा साहेब की बातों को अपने दैनिक आचरण में उतार ले, तो समरस समाज का निर्माण स्वतः ही हो जाएगा। महाराज ने युवाओं को उनके संघर्षों से सीख लेकर राष्ट्रहित में कार्य करने का आशीर्वाद प्रदान किया।
मुख्य वक्ता का विशेष पाथेय: संगोष्ठी के मुख्य वक्ता उदयपुर के मीरा कन्या महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं प्रखर विद्वान डॉ. सुनील खटीक ने अपने संबोधन में बाबा साहेब के वैश्विक दृष्टिकोण पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने अपनी शोधपूर्ण लेखनी और 'भीम-मीम गठजोड़ - कथ्य एवं तथ्य' जैसी पुस्तकों का हवाला देते हुए समाज को वैचारिक स्पष्टता रखने का आह्वान किया। डॉ. खटीक ने स्पष्ट किया कि बाबा साहेब का विजन अखंड भारत और सामाजिक न्याय पर आधारित था, जिसे आज के दौर में सही तथ्यों के साथ समझना अनिवार्य है।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितेश आर्य ने प्रशासनिक और सामाजिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने जिस शिक्षा का मंत्र दिया था, वही आज के युवाओं के लिए सफलता का एकमात्र द्वार है। उन्होंने बल दिया कि बाबा साहेब की शिक्षाओं का संबल लेकर ही वर्तमान पीढ़ी समाज की कुरीतियों से लड़ सकती है और एक अनुशासित एवं प्रगतिशील भविष्य की नींव रख सकती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला कोषाधिकारी जसराज चौहान ने इस विषय पर अपने गहन अध्ययन और विशेष पाठ्य सामग्री के साथ श्रोताओं को लाभान्वित किया। चौहान साहब ने बाबा साहेब के आर्थिक सुधारों और उनके द्वारा रचित संवैधानिक ढाँचे की बारीकियों पर चर्चा की। उन्होंने समाज के प्रति बाबा साहेब के समर्पण को अद्वितीय बताते हुए उन्हें आधुनिक भारत का सबसे बड़ा समाजशास्त्री बताया।
विशिष्ट अतिथि के विचार (विसुधा कंडारा): विशिष्ट अतिथि विसुधा कंडारा (प्रधानाचार्य) ने शिक्षा के क्षेत्र में बाबा साहेब के योगदान और उनके महिला सशक्तिकरण के स्वप्न पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने समाज के हर वर्ग को सम्मान से जीने का अधिकार दिया है, विशेषकर महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों के लिए उनके द्वारा किए गए कार्य युगों-युगों तक याद रखे जाएंगे।
विशिष्ट अतिथि के विचार (वीणा पनपालिया): विशिष्ट अतिथि वीणा पनपालिया (प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता) ने अपने संबोधन में बाबा साहेब के समरस समाज के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के आदर्शों पर चलकर ही हम एक भेदभाव रहित समाज की कल्पना कर सकते हैं। उन्होंने उपस्थित महिलाओं और युवाओं से आग्रह किया कि वे बाबा साहेब के बताए मार्ग पर चलकर समाज सेवा के कार्यों में अपनी भागीदारी बढ़ाएं।
संगोष्ठी के संयोजक डॉ. जसवंत सिंह मायला ने अपने प्रभावी अंदाज में कार्यक्रम की भूमिका रखी और स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। डॉ. मायला ने बाबा साहेब के जीवन के विभिन्न पड़ावों और उनके विराट व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए सभी अतिथियों का भावभीना अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि इस गोष्ठी का उद्देश्य बाबा साहेब के वास्तविक राष्ट्र-दर्शन को जन-जन तक पहुँचाना है।
कार्यक्रम के सफल समापन पर सह-संयोजक जयरामदास मेघवाल ने सभी वक्ताओं, अतिथियों और टाउन हॉल में उपस्थित विशाल जनसमूह का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन समिति और स्वयंसेवकों के प्रति भी कृतज्ञता ज्ञापित की जिनके अथक प्रयासों से यह विचार गोष्ठी बाड़मेर के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अरविंद तापड़िया, श्रवण सिंह ने राष्ट्रभक्ति के गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। डॉ. संगीता: गोष्ठी का समापन आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. संगीता ने 'वंदे मातरम' का गायन किया। कार्यक्रम का संचालन भगवान बारूपाल ने किया। आयोजन समिति में प्रकाश भूतड़ा, पृथ्वी चंडक, नरपत सिंह राजपुरोहित, भोमसिंह सुंदरा विजय सिंह तारातरा,का सहयोग रहा।
इस दौरान रिखबदास बोथरा सुरेंद्र मेहता विधायक आदुराम मेघवाल, बीजेपी जिला अध्यक्ष अनंतराम बिश्नोई, दिलीप पालीवाल, एबीवीपी संगठन मंत्री पवन ऐचरा, डॉ प्रदीप राठी बलवंत सिंह, पूर्व सभापति दीपक माली,प्रो.श्रवण बालाच गर्ग समाज अध्यक्ष बाबूलाल, प्रो,मेघाराम गढ़वीर , ताराचंद जाटोल, ईश्वर नवल मगाराम मेघवाल, खेताराम पंवार, हीरालाल खोरवाल, राकेश कुलदीप डॉ खगेन्द्र भील, प्रेम दान देथा, विष्णुराम मुख्य चिकित्सा अधिकारी,,तेजाराम कोडेचा, जगदीश लंगेरा, महेंद्र घारू, टीकमदास राठी, डॉ संदीप रांकावत, सोनाराम चौधरी अधीक्षण अभियंता, प्राचार्य बाबूलाल, अमराराम लीलड, आदि उपस्थित रहे
