किसानों की कर्ज माफी से केंद्र का इनकार: लोकसभा में सांसद हनुमान बेनीवाल के सवाल पर वित्त मंत्री का बड़ा बयान
नई दिल्ली/नागौर। देश के अन्नदाता और कर्ज के बोझ तले दबे किसानों के लिए दिल्ली से एक निराशाजनक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल किसानों की पूर्ण कर्ज माफी को लेकर सरकार के पास कोई योजना विचाराधीन नहीं है। यह जानकारी लोकसभा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी है।
संसद में गूंजा किसानों के कर्ज का मुद्दा
सांसद हनुमान बेनीवाल ने सदन में किसानों पर बढ़ते आर्थिक दबाव और उनकी बदहाली का मुद्दा उठाते हुए सरकार से पूछा था कि क्या केंद्र सरकार किसानों का कर्ज माफ करने पर विचार कर रही है? इसके जवाब में वित्त मंत्री ने साफ तौर पर 'ना' कह दिया। बेनीवाल ने सरकार के इस रुख पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यह उन करोड़ों किसानों के साथ अन्याय है जो खेती में लगातार घाटा सह रहे हैं और परिवार पालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
आंकड़ों ने खोली पोल: राजस्थान के किसानों पर 1.92 लाख करोड़ का कर्ज
सरकार द्वारा सदन में पेश किए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के मुताबिक:
- राजस्थान: अकेले राजस्थान के किसानों पर 1,92,293 करोड़ रुपये का कृषि कर्ज बकाया है।
- देश भर का हाल: पूरे भारत के किसानों पर कुल 31,34,808 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज है।
- कर्ज की रफ्तार: पिछले तीन सालों (2022-23 से 2024-25) में कृषि ऋण वितरण में 15% (CAGR) की बढ़ोतरी हुई है, जो यह दर्शाता है कि किसान अपनी जरूरतों के लिए कर्ज पर और ज्यादा निर्भर होता जा रहा है।
'आय दुगुनी का वादा सिर्फ जुमला' - बेनीवाल
सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि एक तरफ सरकार किसानों की आय दुगुनी करने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ कर्ज के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि और फसल बीमा जैसी योजनाएं ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं।
बेनीवाल की प्रमुख मांगें:
- किसानों का संपूर्ण कर्ज एक बार में माफ किया जाए।
- किसान सम्मान निधि को सालाना 6 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जाए।
- किसानों को केवल योजनाओं में उलझाने के बजाय उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए।
सांसद ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार की यह उदासीनता किसान भाइयों के लिए दुखद है और वे किसानों के हक की लड़ाई सड़क से संसद तक जारी रखेंगे।
