बाड़मेर


सोमवार दोपहर को पचपदरा रिफाइनरी में हुई आगजनी की घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में गंभीर चूक बताया और आरोप लगाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और लापरवाही का परिणाम है। 


पचपदरा में निर्माणाधीन एचआरएलएल रिफाइनरी के CDU–VDU यूनिट में आग लगने की घटना ने न केवल परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सुरक्षा, गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर स्थानीय सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने इस घटना को गंभीर लापरवाही और जल्दबाजी का परिणाम बताते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। 

बेनीवाल ने कहा कि रिफाइनरी का जो मुख्य हृदय कही जाने वाली केन्द्र बिन्दु जिस यूनिट का शुभारंभ करना प्रस्तावित था उसी में आगजनी होना सुरक्षा में गंभीर चूक के साथ भ्रष्टाचार और लापरवाही का परिणाम हैं।

सांसद बेनीवाल ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि जिस परियोजना की लागत शुरुआत में 37 हजार करोड़ रुपये निर्धारित थी, उसका बढ़कर 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाना स्पष्ट रूप से वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में अनुभवहीन कंपनियों को शामिल किया गया, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हुई और अंततः इस तरह की दुर्घटना सामने आई। और इस रिफाइनरी के पूर्ण होने तक करीब सवा लाख करोड़ व्यय होने का अनुमान हैं इतना बड़ा बजट शुरूआती शुभारंभ से पहले ही आगजनी की घटना ने पूरे प्रोजेक्ट्स की पोल खोल दी हैं।

सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने कहा कि CDU–VDU यूनिट रिफाइनरी की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है, जहां कच्चे तेल का परिष्करण कर उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इस यूनिट में आग लगना यह दर्शाता है कि सुरक्षा मानकों का पालन ठीक से नहीं किया गया। उन्होंने इसे केवल एक तकनीकी दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसे संभावित लापरवाही और प्रबंधन की विफलता करार दिया। 

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इसी यूनिट के उद्घाटन का कार्यक्रम निर्धारित था। ऐसे में घटना का समय और स्थान दोनों ही सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब परियोजना पूरी तरह तैयार नहीं थी, तो उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित करने की जल्दबाजी क्यों की गई। आधी अधूरी रिफाइनरी का उद्घाटन कराने की मंशा बड़ी गंभीर लापरवाही का बड़ा विषय हैं।

सांसद बेनीवाल ने प्रोसेसिंग यूनिट में आगजनी की घटना पर मांग करते हुए कहा कि इस घटना की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाई जाए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे और वास्तविक तथ्यों का खुलासा हो सके। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, ठेकेदारों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि आमजन के विश्वास को भी कमजोर करती हैं। इसलिए भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निगरानी, पारदर्शी प्रक्रिया और उच्च गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।