जयपुर। गुलाबी नगरी के ऐतिहासिक अल्बर्ट हॉल के सामने गुरुवार की शाम राजस्थान की समृद्ध विरासत और लोक कला के रंगों से सराबोर रही। अवसर था 'राजस्थान दिवस' का, जिसे मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में राज्य स्तरीय भव्य सांस्कृतिक संध्या के रूप में मनाया गया। इस दौरान लोक गायन और नृत्यों की ऐसी लहर चली कि वहां मौजूद हजारों लोग मंत्रमुग्ध हो गए।


पद्मश्री कलाकारों ने अपनी सुरीली प्रस्तुतियों से बांधा समां

​मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को राजस्थान दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम की मुख्य विशेषता पद्मश्री श्री अनवर खां मांगणियार एवं दल और पद्मश्री श्री तगाराम भील एवं दल की प्रस्तुतियां रहीं। कलाकारों ने अपनी सुरीली आवाज और वादन से राजस्थानी संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश की। उनके साथ आए करीब 100 से अधिक लोक कलाकारों और कथक नृत्यांगनाओं ने मंच पर अपनी ऊर्जा से पूरे जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

लोक नृत्यों की शानदार झलक और सरकार की उपलब्धियों का प्रदर्शन

​सांस्कृतिक संध्या के दौरान राजस्थान के पारंपरिक नृत्यों की धूम रही। कलाकारों ने घूमर, गैर, चरी, कच्छी घोड़ी और कालबेलिया जैसे विश्व प्रसिद्ध लोक नृत्यों का शानदार प्रदर्शन किया। अल्बर्ट हॉल की दूधिया रोशनी और इन पारंपरिक नृत्यों के मेल ने समां बांध दिया। इस दौरान राज्य सरकार के 2 वर्ष से अधिक के जनसेवा को समर्पित कार्यकाल एवं उपलब्धियों पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

भव्य आतिशबाजी ने शहरवासियों में भरा जोश

​करीब 2 घंटे से अधिक समय तक चले इस कार्यक्रम का समापन बेहद भव्य और रंग-बिरंगी आतिशबाजी के साथ हुआ। पटाखों की रोशनी ने जहां एक ओर अल्बर्ट हॉल की भव्यता को बढ़ाया, वहीं इनकी गूंज ने शहरवासियों को उत्साह और जोश से भर दिया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लोक कलाकार श्री तगाराम भील एवं श्री अनवर खां मांगणियार को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और अन्य कलाकारों का भी उत्साह बढ़ाया।

कार्यक्रम में ये दिग्गज रहे मौजूद

​इस खास अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी एवं डॉ. प्रेमचंद बैरवा, संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल, विभिन्न सांसद, विधायक, मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास और पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।