राजस्थान में पंचायत चुनाव के नियमों में बड़ा बदलाव: अब 'दो से ज्यादा संतान' वाले भी बन सकेंगे सरपंच और पंच
जयपुर। राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश की राजनीति और स्थानीय स्वशासन को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सोमवार को विधानसभा में 'राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक' पारित कर दिया गया। इस नए कानून के बाद अब उन लोगों के चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है, जिनकी दो से अधिक संतानें हैं।
संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने विधेयक पारित होने के बाद मीडिया से बात करते हुए इसे एक 'क्रांतिकारी कदम' बताया। उन्होंने कहा कि समय बदल चुका है और अब पुराने नियमों को ढोने की आवश्यकता नहीं है।
क्यों हटाया गया 30 साल पुराना नियम?
मंत्री जोगाराम पटेल ने इस बदलाव के पीछे के वैज्ञानिक और सामाजिक कारणों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया:
- प्रजनन दर में गिरावट: जब 1994 में यह नियम लागू हुआ था, तब राजस्थान में प्रजनन दर (Fertility Rate) 3.6 थी। लेकिन अब यह घटकर 2.0 रह गई है।
- भविष्य का संकट: आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रजनन दर 2.0 से नीचे जाती है, तो यह भविष्य के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
- स्वैच्छिक जागरूकता: अब समाज में 'हम दो, हमारे दो' का संदेश घर-घर पहुंच चुका है। लोग खुद जागरूक हैं, इसलिए अब कानून के जरिए इसे थोपने की जरूरत नहीं है।
'रामराज्य' और समानता की भावना
सरकार का तर्क है कि मात्र बच्चों की संख्या के आधार पर किसी योग्य व्यक्ति को नेतृत्व करने से रोकना लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। मंत्री ने कहा कि जिस तरह सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति (Promotion) से यह बाधा हटाई गई थी, उसी तर्ज पर अब जनप्रतिनिधियों को भी समान अवसर दिए जा रहे हैं। यह निर्णय 'स्थानीय स्वशासन' को मजबूत करेगा और प्रतिभावान अनुभवी लोगों को आगे आने का मौका देगा।
विपक्ष को जवाब और चुनाव की तैयारी
पंचायत चुनावों में देरी के विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए विधि मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। विभाग की ओर से सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। अब जैसे ही राज्य निर्वाचन आयोग तारीखों का एलान करेगा, सरकार पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न कराएगी।
विकास के दम पर उतरेंगे मैदान में
श्री पटेल ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि सरकार केवल इस संशोधन के भरोसे नहीं, बल्कि राज्य में किए गए 'अभूतपूर्व विकास कार्यों' और 'विकसित राजस्थान' के संकल्प को लेकर जनता के बीच जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बदलाव से ग्रामीण क्षेत्रों में एक नया और ऊर्जावान नेतृत्व उभरकर सामने आएगा।
