राजस्थान यूथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष पद को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। अब तक इस पद के लिए अनिल चोपड़ा, अभिषेक चौधरी और राजकुमार परसवाल ने नामांकन दाखिल कर दिया है, जिससे मुकाबला दिलचस्प त्रिकोणीय होता नजर आ रहा है।
अनिल चोपड़ा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। वे पिछली बार जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं और बेहद मामूली अंतर सिर्फ 1516 वोटों से हार गए थे। उस चुनाव में कांग्रेस की आंतरिक खेमेबाजी उनके लिए भारी पड़ी, अन्यथा जीत लगभग तय मानी जा रही थी। अनिल चोपड़ा को सचिन पायलट गुट का करीबी माना जाता है। फिलहाल पायलट केरल चुनाव में व्यस्त हैं, लेकिन यदि वे खुलकर चोपड़ा के समर्थन में उतरते हैं, तो मुकाबले की दिशा बदल सकती है। ऐसे में यूथ कांग्रेस के बड़े चेहरे मुकेश भाकर की रणनीति पर भी सभी की नजर रहेगी।
दूसरी ओर, अभिषेक चौधरी का राजनीतिक सफर भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे लोहावट से टिकट के दावेदार थे, लेकिन आखिरी समय में उन्हें झोटवाड़ा से मैदान में उतारा गया, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह है कि जब राज्य की युवा राजनीति में पायलट का दबदबा था, तब अभिषेक चौधरी ने अशोक गहलोत का साथ दिया। गहलोत ने भी उन्हें तवज्जो दी, लेकिन बदलते समीकरणों के बीच अब वे गोविंद सिंह डोटासरा के करीबी माने जा रहे हैं। अंदरखाने यह चर्चा भी है कि उन्हें संगठन का समर्थन मिल सकता है।
तीसरे उम्मीदवार राजकुमार परसवाल का नाम तेजी से उभर रहा है। वे जिला अध्यक्षों और नई कांग्रेस टीम के बीच खासे सक्रिय हैं। परसवाल को गहलोत खेमे के नेताओं का समर्थन मिलने की बात कही जा रही है, जो उन्हें एक मजबूत विकल्प के रूप में आगे बढ़ाने में जुटे हैं। उनकी बढ़ती स्वीकार्यता ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
कुल मिलाकर, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष पद की यह लड़ाई सिर्फ संगठनात्मक चुनाव नहीं, बल्कि पायलट और गहलोत खेमों के बीच शक्ति परीक्षण के रूप में भी देखी जा रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि युवा नेतृत्व की कमान किसके हाथ में जाती है।