राजस्थान विधानसभा में लगातार सरकार के खिलाफ मुखरता से अपनी बात रखने वाले निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी की सुरक्षा व्यवस्था में अचानक की गई कटौती ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है। भाटी, जो गोचर भूमि, ओरण संरक्षण और सोलर कंपनियों से जुड़े मुद्दों को जोर-शोर से उठाते रहे हैं, अब खुद एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं।जानकारी के अनुसार, पहले भाटी को चार से पांच सुरक्षा कर्मी उपलब्ध कराए जाते थे, लेकिन अब उनकी सुरक्षा घटाकर केवल एक पीएसओ (व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी) तक सीमित कर दी गई है। यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है, जब भाटी ने हाल ही में किशनगढ़ के एक व्यापारी से फिरौती मांगने जैसे गंभीर मुद्दे को भी सदन में स्थगन प्रस्ताव के जरिए उठाया था।
इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। क्या यह निर्णय सरकार के खिलाफ लगातार मुखर रहने का परिणाम है? या फिर यह सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा के बाद लिया गया एक सामान्य प्रशासनिक कदम है?
हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक इस फैसले को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे फैसले अक्सर व्यापक संदेश देते हैं और उनका असर सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता।
दूसरी ओर, भाटी समर्थकों में इस निर्णय को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि एक सक्रिय और मुद्दों पर आवाज उठाने वाले जनप्रतिनिधि की सुरक्षा कम करना उचित नहीं है।
