बाड़मेर।
सीमांत बाड़मेर के दूरस्थ गांवों और ढाणियों में संचालित “सुरक्षा बंधन यात्रा” अब एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप ले चुकी है। भीषण गर्मी, धूलभरे रास्तों और लंबी दूरी के बावजूद इंडियन रूरल डेवलपमेंट एंड अवेयरनेस सोसायटी (IRDAS) की टीम निरंतर जनजागरण करते हुए गांव-गांव पहुंच रही है। यह यात्रा अब केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और जिम्मेदारी का सशक्त प्रतीक बन गई है।
अभियान के तहत यात्रा तड़ला, बेड़िया, लालजी की डूंगरी, सिसावा, गांधव, रामजी का गोल, श्री नारायण गौशाला रडू, धोरीमन्ना, मांगता, बाछड़ाऊ, सनावड़ा, डुगरों का तला और हाथीताला सहित कई सीमांत गांवों व ढाणियों में पहुंची। हर स्थान पर ग्रामीणों ने टीम का आत्मीय स्वागत किया और इस पहल को जनहित में अत्यंत आवश्यक बताया।
यात्रा के दौरान पशुओं के गले में रिफ्लेक्टर बेल्ट बांधने का कार्य निरंतर जारी है। रात्रि के समय वाहन की रोशनी पड़ते ही ये बेल्ट चमकते हैं, जिससे पशु दूर से दिखाई देते हैं और सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। ग्रामीणों ने इसे “जीवन बचाने वाला सरल उपाय” बताया।
हर गांव में युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों का उत्साह देखने को मिला। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने स्वयं आगे आकर पशुओं को बेल्ट पहनाने में सहयोग किया। महिलाओं ने मंगल गीतों के साथ स्वागत किया तो युवाओं ने अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
यात्रा के दौरान टीम ने ग्रामीणों के साथ संवाद कर उन्हें पशु सुरक्षा और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। लोगों को बताया गया कि पशुपालन के साथ-साथ उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी समाज की है।
संस्था के महेंद्र सिंह तारातरा ने कहा कि “यह अभियान केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए है। यदि हम आज जागरूक हो जाएं तो कल अनेक दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव लाते हैं।”
संस्था ने बताया कि आगामी दिनों में सुरक्षा बंधन यात्रा जिले के अन्य सीमांत क्षेत्रों में भी पहुंचेगी। IRDAS ने युवाओं, सामाजिक संगठनों और आमजन से इस अभियान से जुड़ने की अपील की है।
यात्रा में यात्रा में ओम सिंह आगोर, विक्रम सिंह तारातरा,रतन सिंह भाटी, जबर सिंह तारातरा, अवतार सिंह तारातरा,देवेंद्र सिंह फ़ोगेरा,सोहन सिंह मिठड़ा,हय्यात खान,बाबू सिंह बूठ और सिद्धाराज सिंह तारातरा और अरुण राजपुरोहित मौजूद रहे।
