तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक उठापटक अब कानूनी मोड़ ले चुकी है। विधानसभा चुनाव परिणाम आने के चार दिन बाद भी नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है और इसी बीच थलपति विजय की पार्टी टीवीके (TVK) पर फर्जी समर्थन पत्र सौंपने के आरोप में चेन्नई के गुइंडी थाने में मामला दर्ज किया गया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को और अधिक गरमा दिया है।
108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके लगातार बहुमत जुटाने की कोशिश में लगी हुई है। पार्टी प्रमुख थलपति विजय लगातार राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात कर रहे हैं, लेकिन सरकार गठन की तस्वीर अब तक साफ नहीं हो सकी है। इसी बीच एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने बड़ा आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी के विधायक एस. कामराज के नाम से टीवीके के समर्थन में जो पत्र राज्यपाल को सौंपा गया, वह फर्जी था।
दिनाकरन ने कहा कि उन्होंने खुद राज्यपाल से मुलाकात कर असली समर्थन पत्र सौंपा, जिसमें उनके मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पलानीस्वामी के समर्थन की बात दर्ज थी। उनका आरोप है कि टीवीके ने समर्थन का दावा मजबूत दिखाने के लिए पत्र की फर्जी फोटोकॉपी का इस्तेमाल किया। दिनाकरन के मुताबिक राज्यपाल ने जब मूल दस्तावेज मांगा, तब कथित जालसाजी का मामला उजागर हुआ।
उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ गंभीर धोखाधड़ी बताते हुए कहा कि इस मामले में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी। इसके बाद चेन्नई के गुइंडी थाने में टीवीके से जुड़े लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
हालांकि टीवीके ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी ने एएमएमके विधायक एस. कामराज का एक वीडियो जारी किया, जिसमें वह खुलकर थलपति विजय को समर्थन देने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कामराज ने दावा किया कि उन्होंने यह फैसला टीटीवी दिनाकरन की सहमति से लिया था।
राजनीतिक ड्रामे के बीच देर रात टीटीवी दिनाकरन एक बार फिर विधायक कामराज के साथ लोकभवन पहुंचे। वहां उन्होंने एक पत्र पढ़कर दावा किया कि राज्यपाल को सौंपा गया एआईएडीएमके समर्थित पत्र ही वैध और अधिकृत दस्तावेज है।
तमिलनाडु की राजनीति में इस नए विवाद ने सरकार गठन की प्रक्रिया को और उलझा दिया है। अब सबकी नजर राज्यपाल के अगले कदम और संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि समर्थन पत्र को लेकर फर्जीवाड़ा साबित होता है, तो यह मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक संकट का रूप भी ले सकता है।