बाड़मेर।
 
केबीपी हाईटस में गुरूवार को केयुप साधार्मिक वर्षीतप समिति के तत्वावधान में चल रहे वर्षीतप की तपस्या का बियासना सम्पन्न हुआ। 13 माह की वर्षीतप की तपस्या बाड़मेर में गतिमान है। केबीपी हाईटस में चल रहे 100 से अधिक वर्षीतप आराधकों के वर्षीतप की तपस्या के बियासने का कार्यक्रम ऐतिहासिक और बेहतरीन साबित हो रहा हैं। 

इस तपस्या के लिए जैन समाज के भामाशाहो के सहयोग सामुहिक नुकरे लिये गये, जिसमें मुख्य लाभार्थी, रत्न स्तम्भ 254000, स्वर्ण स्तम्भ 108000 के बनाये गये। जिनका जैन समाज के भामाशाहो द्वारा उल्लास से लाभ लिया गया और भामाशाह लाभ लेकर पुण्यार्जन कर सकते है। 

बाड़मेर इतनी बड़ी संख्या में उत्साह के साथ कर रहे वर्षीतप की तपस्या से लगता है बाड़मेर नगर में गुरूदेव के चातुर्मास के बाद धर्म की गंगा बहने लगी है। वर्षीतप समिति के रमेश मालू कानासर ने तप की महता बताते हुए कहा कि जैन धर्म तप प्रधान है। कुछ तप ऐसे है, जिनकी आराधना स्वयं तीर्थंकर भगवंतो ने की। 

जैसे आदिनाथ भगवान ने वर्षीतप किया, महावीर स्वामी भगवान ने मासक्षमण आदि तप किए पर कुछ तप ऐसे है जो उनके द्वारा उपदेश में बताये गए है, जैसे सिद्वीतप आदि। तप जीवन को निर्मल बनाता है, तप से स्वास्थ्य ठीक रहता है आदिनाथ परमात्मा के तप का लक्ष्य कर्ममुक्ति, समाधि, साधना, शान्ति और मनशुद्वि था। 

तप से इच्छाएँ समाप्त हो जाती है उसे कर्म और पाप के कवच को भेदा जाता है, आदिनाथ भगवान ने 400 दिन के तप का पारना किया। यह तप वर्षीतप के रूप में प्रसिद्व है। हजारों आराधक हर वर्ष इस तप के द्वारा आत्मा की शुद्धि करते है।
 

ललित छाजेड़ ने बताया कि इस वर्षीतप आराधना में करीब 100 से अधिक आराधक आराधना कर रहे है और इस आराधना में तेरह माह तक एक दिन उपवास व एक दिन बियासणा करना होता है और गर्म पानी का उपयोग होता है। गुरूवार को केयुप वर्षीतप समिति व नुकरे के लाभार्थी परिवार द्वारा वर्षीतप आराधकों को बियासणा हर्षोल्लास के साथ करवाया गया। बियासने के बाद आराधको को संघ प्रभावना दी गई। 


वर्षीतप तपस्वी 10 मई को जायेंगे जैन तीर्थो की यात्रा पर: 
केयुप साधार्मिक वर्षीतप समिति के मनीष संखलेचा ने बताया कि केयुप साधार्मिक वर्षीतप समिति द्वारा वर्षीतप आराधकों के लिए तीन दिवसीय जैन तीर्थ यात्रा 10 मई को रात्रि में हमीरपुरा से रवाना होगा, जो  शंखेश्वर महातीर्थ, पाटण तीर्थ, तारंगाजी तीर्थ ,कुंभारियाजी, अम्बाजी, देलवाड़ा, माउन्ट आबू, पावापुरी,  भेरूतारक, जिरावला पाश्र्वनाथ तथा भांडवाजी आदि तीर्थो की यात्रा कर 13 मई को रात्रि में वापस बाड़मेर पहुंचेंगे।