भीषण गर्मी के बीच पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा जिलों में जल संकट विकराल होता जा रहा है। इंदिरा गांधी नहर में नहरबंदी के चलते पानी की आपूर्ति ठप है, जिसका सीधा असर मोहनगढ़ स्टोरेज पर देखने को मिल रहा है।
मोहनगढ़ स्टोरेज का जलस्तर तेजी से गिरकर 7 मीटर से 4.39 मीटर पर आ गया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि 851 गांवों के लिए अब महज 13 दिन का ही पानी शेष बचा है, जबकि मांग सामान्य से डेढ़ गुना बनी हुई है।
पीएचईडी के अनुसार 10 मई तक नहर क्लोजर जारी रहेगा। इसके बाद भी पंजाब से पानी को मोहनगढ़ तक पहुंचने में करीब 7 दिन का समय लगेगा। यानी 17 मई तक यदि पानी नहीं पहुंचा तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
पीएचईडी के अधीक्षण अभियंता (SE) ने बताया कि मोहनगढ़ में लगभग 15 दिन का पानी बचा है, लेकिन सप्लाई को खींचने के लिए कई क्षेत्रों में पानी देने का अंतराल बढ़ाना पड़ा है, ताकि किसी तरह 19 मई तक व्यवस्था चल सके।
तीनों जिलों में रोजाना करीब 145 एमएलडी पानी की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 90 से 100 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है। करीब 40 प्रतिशत की कटौती ने पूरे जल वितरण सिस्टम को चरमरा दिया है।
बाड़मेर के जीरो पॉइंट पर जलस्तर 4 मीटर होना चाहिए, लेकिन यह घटकर महज 20 सेंटीमीटर रह गया है। पानी का फ्लो भी 1800 से गिरकर 800 पर आ गया है। स्थिति यह है कि शहर का आधा हिस्सा अब निजी टैंकरों पर निर्भर हो गया है।
शहर में 5 से 7 दिन में एक बार पानी मिल रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतराल 20 दिन तक पहुंच गया है। कई गांवों में तो महीनों से पानी की सप्लाई बंद पड़ी है।
बाड़मेर शहर की 21 टंकियों से होने वाली 172 जल आपूर्ति में भारी देरी हो रही है। एईएन कृष्णकुमार गुप्ता के अनुसार, मोहनगढ़ से पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण सप्लाई प्रभावित है। शहर की कुल मांग 24 एमएलडी है, लेकिन उपलब्धता बेहद कम है।
मोहनगढ़ स्टोरेज की कुल क्षमता 3850 एमएल है, जिसमें वर्तमान में 2372 एमएल पानी मौजूद है। हालांकि इसमें से 800 एमएल डेड स्टोरेज है, जिसे उपयोग में नहीं लिया जा सकता। यानी वास्तविक उपयोग के लिए केवल 1570 एमएल पानी ही बचा है।
यदि रोजाना 110 एमएल पानी सप्लाई किया जाए, तो यह स्टॉक अधिकतम 19 मई तक ही चल पाएगा। ऐसे में यदि समय पर पानी नहीं पहुंचा, तो क्षेत्र में जल संकट और गहराने की आशंका है।