अचानक छत से प्लास्टर का हिस्सा टूटकर नीचे गिरा, जिससे कक्षा में बैठी चार छात्राएं उसकी चपेट में आ गईं। मलबा टेबल-कुर्सियों पर बिखर गया और तेज आवाज के साथ पूरे स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए।
हादसे में चडला निवासी पूजा, काली कुमारी, शारदा कुमारी और एक अन्य छात्रा घायल हो गईं। सभी को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। छात्राओं को पीठ, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आई हैं। गनीमत रही कि प्लास्टर का भारी हिस्सा किसी के सिर पर नहीं गिरा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
घटना की सूचना मिलते ही संस्था प्रधान अरुण व्यास ने तुरंत घायलों को अस्पताल भिजवाया और उच्च अधिकारियों को जानकारी दी। मौके पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी पवन कुमार रावल, सीबीईओ केशवचंद्र बामणिया, अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी विक्रम सिंह समेत कई अधिकारी पहुंचे। बाद में एसडीएम मनसुख डामोर, तहसीलदार और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने भवन की तकनीकी जांच कराने, मरम्मत कार्य में तेजी लाने और नए क्लासरूम व प्रयोगशालाओं के निर्माण के प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं।
पहले भी दी जा चुकी थी चेतावनी
ग्रामीणों और स्कूल प्रशासन का कहना है कि विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति को लेकर पहले भी कई बार ज्ञापन और सर्वे रिपोर्ट भेजी जा चुकी है, लेकिन अब तक मरम्मत के लिए पर्याप्त बजट स्वीकृत नहीं हुआ।
मरम्मत के बावजूद गिरा प्लास्टर
जिस कक्षा में यह हादसा हुआ, वहां हाल ही में मरम्मत कार्य कराया गया था। इसके बावजूद प्लास्टर गिरने की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रधानाचार्य का बयान
प्रधानाचार्य अरुण व्यास ने बताया कि स्कूल के सात कमरे जर्जर हैं, जिनमें से तीन को अधिक खराब स्थिति के कारण पहले ही बंद कर दिया गया था। छात्रों को टिन शेड के नीचे बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। गर्मी के कारण मजबूरी में कुछ कक्षाओं को आंशिक रूप से जर्जर कमरों में भी संचालित किया जा रहा था।
