बाड़मेर
गुरुवार को जिलेभर में नृसिंह जयंती का पर्व धूमधाम से मनाया गया। बाड़मेर शहर के प्राचीन बालाजी मंदिर में शाम को भगवान नृसिह का प्रगटोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम को देखने के लिए लोगों का हुजूम इस कद्र उमड पाड़ा की मंदिर के आगे लोगों को पांव रखने तक की जगह नही मिली।
जैसे ही भगवान नृसिंह कागज के खंभे को फाड़कर उग्र रूप में प्रकट हुए। सबसे पहले भक्त प्रहलाद के रूप धारण कर बैठे बच्चे को आशीर्वाद दिया। भगवान नृसिंह के उग्र स्वरूप को देखकर श्रद्धालु भाव- विभोर हो गए और उनसे आशीर्वाद लेने की होड़ मच गई। चारों तरफ भगवान नृसिह के जयकारे गूंज उठे।
जिस कागज के खम्भे को फाड़कर भगवान नृसिंह रूप में प्रकट हुए उसी कागज को प्रसाद स्वरूप भक्तों में बांटा गया। इस प्रसाद को लेने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। मान्यता है कि इस कागज को पर्स, दुकान के गल्ले या तिजोरी में रखने से धन-धान्य में वृद्धि होती है और घर-परिवार में समृद्धि बनी रहती है।
उन्होंने बताया कि परिवार से जुड़े दिनेश श्रीमाली ने आज भगवान के मुखौटे को धारण कर कागज के खम्भे को फाड़कर भगवान नृसिंह रूप में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए। कागज खम्भे के टुकड़े प्रसाद स्वरूप भक्तों में बांटे गए।भगवान नृसिह का प्रगटोत्सव को लेकर श्रद्धालुओ में जबरदस्त तरीके का उत्साह देखने को मिला।
पुजारी मुरली मनोहर दवे ने बताया कि 200 सालों से नृसिह जयंती मन्दिर में मनाई जा रही है। भगवान नृसिंह का प्राचीन मुखौटा सदियों पुराना था जो कि 25- 30 बरस पहले जयंती के दिन भीड़ में टूट गया था। उन्होंने बताया कि इसके बाद पश्चिम बंगाल के पुरुलिया से मिट्टी कुट्टी से विशेष रूप से नया मुखौटा बनवाया गया। यह मुखौटा आज भी मंदिर का प्रमुख आकर्षण बना हुआ है।
