बाड़मेर
राजस्थान के पश्चिमी और रेगिस्तानी जिले बाड़मेर की रहने वाली दीपू कंवर ने गुजरात में जज बन रचा इतिहास। और इस सफलता का पूरा श्रेय उन्होंने अपने सास ससुर को दिया है। 
शादी के 7 साल बाद बनी जज
जामनगर गुजरात की रहने वाली दीपू कंवर की शादी आज से 7 साल पूर्व जालिपा बाड़मेर के लोकेन्द्रसिंह के साथ हुई थी। उस समय दीपू कंवर LLB सेकंड ईयर की स्टूडेंट थी। पीहर से जब दीपू कंवर ससुराल आई तो अपने साथ एक बड़े न्यायिक अधिकारी बनने का अपना सपना साथ लेकर आई। 

महज 8 दिन ही जालिपा रही।
शादी के वक्त दीपू कंवर महज 8 दिन ही अपने ससुराल रही उसके बाद वापिस जामनगर चली गई क्योंकि उनके एग्जाम थे। क्योंकि उनकी LLB चल रही थी। 

ससुराल में ही रूम को बनाया हॉस्टल रूम।
सूत्रों के अनुसार दीपू कंवर ने बताया कि जब वापिस जामनगर से ससुराल बाड़मेर आई तब मेरे ससुराल वालों ने मेरे सपने (न्यायिक अधिकारी बनने का) को ही अपना सपना बनाया।  
मै यहां अपने घर के काम, सामाजिक रीति रिवाज में जाना वगैरह करती तो मेरे सास ससुर मुझे मना करते कि पहले कुछ बनकर दिखाओ अपनी पढ़ाई पर पूरा फोकस करो ये काम तो होते रहेंगे। बस उसके बाद मैने अपना पूरा फोकस अपनी स्टडी पर देना शुरू कर दिया। और अपने घर में ही मैने खुद के रूम को एक होस्टल रूम जैसा बना दिया। और अपनी पढ़िए जारी रखी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गुजरात स्टेट में यह अनिवार्य है कि आप प्रेक्टिस एडवोकेट ही होने चाहिए तभी आप अपना एग्जाम दे सकते हैं। इसलिए दीपू कंवर ने बताया कि मैने 2021 से ही कोर्ट में प्रेक्टिस शुरू कर दी जो आज तक कर रही हूं।
उन्होंने बताया कि 2022 में पहली बार परीक्षा दी। उन्होंने बताया कि प्री और मैंस दोनों क्लियर कर दिए पर इंटरव्यू में रह गई। पर उनका कहना है कि उन्होंने कभी अपनी हिम्मत नहीं हारी अपनी तैयारी जारी रखी और 2025 में 79वीं रैंक के साथ उनका सिलेक्शन हो गया। 

दीपू कंवर ने मिडिया से बात करते हुए बताया कि ससुराल में रहकर उन्होंने हमेशा अपने संस्कारों को प्राथमिकता दी। संस्कारों का हमारी पढ़ाई और करियर से कोई लेना नहीं है। क्योंकि हमारे संस्कार अपनी जगह है और हमारी पढ़ाई अपनी जगह। हमारे संस्कार हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है।