डोडा पोस्त को शुरू करने की मांग को लेकर बुजुर्गों ने शुक्रवार को बाड़मेर में प्रदर्शन किया। अलग - अलग गांवों से आए ग्रामीणों ने बाड़मेर जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर 10 साल से बंद पड़े डोडा पोस्त को फिर से शुरू करने की मांग की।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के जरिए सरकार से मांग की है कि फिर से डोडा पोस्त की दुकानें शुरू की जाए। ग्रामीणों ने अतिरिक्त जिला कलक्टर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम ज्ञापन सौंपा।

साल 2016 में वसुंधरा राजे सरकार ने डोडा पोस्त की दुकानों को बंद कर डोडा पोस्त पर प्रतिबंध लगा दिया था। जिसके बाद नशा छुड़वाने के लिए नशामुक्ति कैंप भी लगाए गए थे। इन सबके बाद अब एक बार फिर से डोडा पोस्त शुरू कर की मांग उठी है।

शुक्रवार को अलग अलग गांवों के दर्जनों ग्रामीण जिला मुख्यालय स्थित महावीर पार्क में एकत्रित हुए। जहां से "डोडा पोस्त की दुकानें शुरू करो" के नारे लगाते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ग्रामीण डूंगराराम का कहना है कि डोडा पोस्त की दुकानें शुरू की जाती है तो एक तो पुलिस को किसी को पकड़ना नहीं पड़ेगा और दूसरी ओर डोडा पोस्त के आदी लोगों को लाइसेंसी दुकानों से डोडा पोस्त आसानी से मिल जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि राजस्थान में डोडा पोस्त के लाइसेंसी ठेके चलते थे। 31 मार्च 2016 को सरकार ने ठेके बंद कर दिए। जिसके बाद से डोडा पोस्त के आदी बुजुर्गों के हाल बेहाल हो गए है। ऐसी स्थिति में युवाओं को ना चाहते हुए भी बुजुर्गों के लिए डोडा पोस्त की व्यवस्था करनी पड़ती है।