हालांकि लगातार बढ़ती गर्मी अब आंदोलनकारियों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। आंदोलन के नौवें दिन अत्यधिक गर्मी के कारण विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की तबीयत बिगड़ गई थी। मौके पर डॉक्टरों की टीम बुलानी पड़ी, जिन्होंने धरनास्थल पर ही उनका प्राथमिक उपचार किया और ड्रिप लगाकर स्वास्थ्य जांच की।
धरने पर ग्रामीणों की गर्मी की वजह से बिगड़ी तबियत स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद विधायक भाटी धरना स्थल से हटे नहीं। उन्होंने श्रमिकों के बीच बैठकर आंदोलन जारी रखा और कहा कि मजदूरों तथा ग्रामीणों के अधिकारों की यह लड़ाई किसी भी हाल में कमजोर नहीं पड़ने दी जाएगी।
दसवें दिन कई श्रमिकों और ग्रामीणों की बिगड़ी तबीयत
धरने के दसवें दिन भीषण गर्मी का असर अन्य आंदोलनकारियों पर भी साफ दिखाई दिया। धरनास्थल पर बैठे कई श्रमिकों, बुजुर्ग ग्रामीणों और महिलाओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सूचना पर मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और कई लोगों का उपचार किया गया। कुछ आंदोलनकारियों को ड्रिप भी लगानी पड़ी।
धरने पर ग्रामीणों की बिगड़ी तबियतलगातार तेज धूप, गर्म हवाओं और ऊँचे तापमान के कारण धरनास्थल पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ बढ़ती जा रही हैं। इसके बावजूद आंदोलनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
श्रमिकों ने कहा कि वे लंबे समय से रोजगार सुरक्षा, श्रमिक अधिकारों और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला। ऐसे में आंदोलन जारी रखना उनकी मजबूरी बन गया है।
“गर्मी से संघर्ष कमजोर नहीं होगा” — रविन्द्र सिंह भाटी
धरनास्थल को संबोधित करते हुए विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि भीषण गर्मी जरूर चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इससे आंदोलन की ताकत और संकल्प कमजोर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जब मजदूरों और स्थानीय युवाओं के भविष्य की बात आती है तो हर परिस्थिति में संघर्ष करना पड़ता है।
भाटी ने कंपनी और प्रशासन पर श्रमिकों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लंबे समय से स्थानीय लोगों की मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके कारण लोगों को सड़क पर उतरना पड़ा।
आंदोलन की प्रमुख मांगें अब भी कायम
धरनास्थल पर मौजूद श्रमिकों और ग्रामीणों ने एक बार फिर अपनी प्रमुख मांगों को दोहराया। इनमें कंपनी द्वारा निकाले गए 100 से अधिक ड्राइवरों और श्रमिकों की पुनर्बहाली, सभी कर्मचारियों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी लागू करना, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना, नियमानुसार वेतन और बोनस उपलब्ध करवाना तथा श्रमिकों के लिए मूलभूत सुविधाएँ सुनिश्चित करना शामिल है।
लगातार बढ़ रहा जनसमर्थन
गिरल लिग्नाइट माइंस का आंदोलन अब धीरे-धीरे बड़े जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। लगातार दस दिनों से धरनास्थल पर लोगों की भीड़ और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी यह संकेत दे रही है कि स्थानीय लोगों में कंपनी के प्रति भारी नाराजगी है।
भीषण गर्मी और स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद आंदोलनकारियों का डटे रहना इस संघर्ष की गंभीरता को दर्शाता है। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
