बाड़मेर

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद,जिला बाड़मेर द्वारा वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती एवं हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित “शौर्यगाथा- राष्ट्रीयता एवं स्वाभिमान जड़े हैं हमारी” वैचारिक संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का शनिवार को माधव महाविद्यालय, महाबार रोड, बाड़मेर में भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही। परिसर में प्रदर्शनी के माध्यम से राष्ट्रभक्ति एवं वीरता के भाव से ओतप्रोत दिखाई दिया।


कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती, स्वामी विवेकानंद एवं महाराणा प्रताप के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्पण के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति गीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्होंने उपस्थित जनसमूह में राष्ट्रप्रेम एवं गौरव का भाव जागृत किया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माननीय विभाग संघचालक मनोहर लाल बंसल ने अपने उद्बोधन में कहा कि महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के ऐसे महानायक हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी स्वाभिमान एवं स्वतंत्रता से कभी समझौता नहीं किया। उनका जीवन संघर्ष, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से महाराणा प्रताप के आदर्शों को जीवन में अपनाकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।


विशेष उपस्थिति के रूप में उपस्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, जोधपुर प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री उपमन्यु सिंह राणा ने कहा कि भारत का गौरवशाली इतिहास युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल एक युद्ध नहीं, बल्कि राष्ट्रस्वाभिमान एवं स्वतंत्रता की रक्षा का प्रतीक था। 

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि जिस प्रकार महाराणा प्रताप का महिमा मंडन होना चाहिए था , उनके शौर्य और बलिदान को इतिहास में लिखा जाना चाहिए था ..उनको वह स्थान नहीं मिला। जबकि अकबर एक आततायी था, हमारे देश के लिए, हमारी संप्रभुता के लिए आक्रांता था, उसके बावजूद भी उसे अकबर महान का दर्जा दिया गया। आज आवश्यकता है कि युवा अपने इतिहास, संस्कृति एवं मूल्यों को समझते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।


कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि राजकीय महाविद्यालय बाड़मेर के सहायक आचार्य खंगेंद्र कुमार भील ने बताया की हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप के सहयोगी के रूप में राणा पूंजा भील के नेतृत्व में हज़ारों भील योद्धाओं ने अपनी पारंपरिक धनुष-बाण कला और छापामार युद्ध नीति से मुगल सेना को भारी नुकसान पहुँचाया। उन्होंने बताया कि महाराणा प्रताप सद्भाव, शौर्य और समरसता के प्रतीक थे। वह एक सफल जननायक,आदर्श बेटे और आदर्श पिता थे जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए, उसकी अस्मिता को बचाए रखने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया और यह उनकी सद्भावना थी कि उनके साथ उनका पूरा परिवेश उठ खड़ा हुआ और कंधे से कंधा मिलाकर लड़ता रहा। 

गणपत सिंह राजपुरोहित ने बताया कि अकबर के काल में जब लगभग पूरा उत्तर भारत मुगल सत्ता के आगे झुक चुका था, तब महाराणा प्रताप ने अकेले संघर्ष जारी रखा, उन्होंने मान सिंह और टोडरमल जैसे दूतों द्वारा भेजे गए अकबर के संधि प्रस्तावों को ठुकरा दिया, क्योंकि वे मेवाड़ की संप्रभुता से समझौता नहीं करना चाहते थे। 

मारवाड़ रत्न दीपसिंह रणधा ने महाराणा प्रताप के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व साहस, धैर्य एवं आत्मसम्मान की प्रेरणा देता है। उनके संघर्षों ने भारतीय समाज को सदैव अन्याय एवं पराधीनता के विरुद्ध लड़ने की शक्ति प्रदान की है।


कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत, कविता एवं नाट्य प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं ने राष्ट्रहित एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति सजग रहने का संकल्प लिया।


अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला प्रमुख घेवरचंद बिश्नोई ने बताया कि “शौर्यगाथा” कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को भारत के गौरवशाली इतिहास एवं महान विभूतियों के जीवन से परिचित कराना है, ताकि उनमें राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान एवं सांस्कृतिक चेतना का विकास हो सके।


कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थी परिषद बाड़मेर की जिला संयोजक दीपू चौहान ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया और कहा आयोजन को सफल बनाने में परिषद के कार्यकर्ताओं एवं विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह का वातावरण देखने को मिला।


इस दौरान विभाग संगठन मंत्री पवन एचरा, प्रांत सहमंत्री विजय शर्मा, प्रांत एसएफएस प्रमुख भगवान बारूपाल, विभाग प्रमुख चम्पालाल जांगिड, विभाग संयोजक कर्णपाल सिंह कोटड़ा एवं विभाग कोष प्रमुख राणसिंह राजपुरोहित, विभाग छात्रा प्रमुख सुनीता जांगिड़ आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।