जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट कर दिया कि हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। इस फैसले के साथ ही हाईकोर्ट द्वारा भर्ती रद्द करने का निर्णय प्रभावी रूप से बरकरार हो गया है।
गौरतलब है कि पहले राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को SI भर्ती-2021 को रद्द कर दिया था। इसके बाद इस फैसले को खंडपीठ (डिवीजन बेंच) में चुनौती दी गई, लेकिन 4 अप्रैल 2026 को खंडपीठ ने भी एकलपीठ के निर्णय को सही ठहराते हुए उसे बरकरार रखा।
इसके खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा SLP खारिज किए जाने के बाद अब इस भर्ती के दोबारा बहाल होने की संभावनाएं लगभग खत्म हो गई हैं।
सरकार की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि राज्य सरकार ने अभी तक सुप्रीम कोर्ट में अपनी ओर से कोई स्वतंत्र अपील दायर नहीं की है। जबकि ट्रेनी SI लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं कि वह जल्द से जल्द शीर्ष अदालत में अपील दाखिल कर मजबूत पैरवी करे।
सरकार ने पहले एकलपीठ के फैसले के खिलाफ देरी माफी के साथ खंडपीठ में अपील जरूर की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। इससे अभ्यर्थियों में असमंजस और नाराजगी दोनों बढ़ गई है।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब गेंद पूरी तरह सरकार के पाले में है। यदि सरकार चाहे तो अलग से अपील दाखिल कर सकती है, लेकिन मौजूदा हालात में चयनित अभ्यर्थियों के लिए राहत की राह बेहद मुश्किल नजर आ रही है।
