तमिलनाडु की त्रिशंकु विधानसभा में अब छोटी क्षेत्रीय पार्टियां सत्ता की सबसे बड़ी कुंजी बनकर उभरी हैं। अभिनेता और टीवीके प्रमुख विजय के नेतृत्व में सरकार गठन की कवायद तेज हो गई है। इसी बीच वीसीके (विदुथलाई चिरुथिगल काची) ने टीवीके को समर्थन पत्र सौंप दिया है, जिससे विजय सरकार के गठन का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है।
चुनाव प्रचार के दौरान अक्सर मतदाता और बड़े राजनीतिक दल छोटे दलों को यह कहकर नजरअंदाज कर देते हैं कि “2-4 सीटें जीतकर क्या कर लेंगे?” लेकिन तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में हर एक सीट का महत्व कितना बड़ा होता है।
इस चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे सहयोगी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ी। ऐसे में सीपीआई, सीपीआई (एम) और वीसीके जैसी छोटी पार्टियां सत्ता के समीकरण में निर्णायक भूमिका निभाने लगीं।
हालांकि इन दलों के पास केवल 2-2 विधायक हैं, लेकिन त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में यही सीटें सरकार बनाने और बचाने के लिए बेहद अहम साबित हो रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि समर्थन के बदले इन दलों को सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय या बोर्ड-निगमों में प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।
वीसीके द्वारा समर्थन पत्र सौंपे जाने के बाद टीवीके खेमे में उत्साह का माहौल है। सूत्रों के अनुसार अब सरकार गठन को लेकर राज्यपाल से मुलाकात और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया जल्द पूरी की जा सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु की यह स्थिति भारतीय राजनीति के उस बड़े सच को फिर सामने लाती है, जहां कई बार छोटी पार्टियां ही सत्ता का भविष्य तय करती हैं। गठबंधन राजनीति के दौर में संख्या चाहे कम हो, लेकिन सही समय पर वही संख्या सबसे ताकतवर बन जाती है।
तमिलनाडु की राजनीति में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि विजय सरकार कब औपचारिक रूप से दावा पेश करती है और छोटे सहयोगी दलों को सरकार में कितनी हिस्सेदारी मिलती है।