बाड़मेर
भीषण गर्मी और तपते मौसम के बावजूद बाड़मेर जिले की गिरल लिग्नाइट माइंस में श्रमिकों और ग्रामीणों का आंदोलन जारी है। शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी लगातार 11वें दिन भी धरनास्थल पर डटे रहे और श्रमिकों के साथ संघर्ष जारी है। हालांकि लगातार पड़ रही भीषण गर्मी और लू के कारण धरनास्थल पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ भी सामने आने लगी हैं।
धरनास्थल को संबोधित करते हुए शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि भीषण गर्मी जरूर चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इससे आंदोलन की ताकत और संकल्प कमजोर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जब मजदूरों और स्थानीय युवाओं के भविष्य की बात आती है, तो संघर्ष हर परिस्थिति में जारी रखना पड़ता है।
भाटी ने कहा कि कंपनी और प्रशासन को श्रमिकों की मांगों पर संवेदनशीलता से निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से स्थानीय श्रमिकों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके चलते लोगों को सड़क पर उतरना पड़ा।
आंदोलन की प्रमुख मांगें अब भी कायम : धरनास्थल पर बैठे श्रमिकों और ग्रामीणों ने एक बार फिर अपनी प्रमुख मांगों को दोहराया। इनमें कंपनी द्वारा निकाले गए 100 से अधिक ड्राइवरों और श्रमिकों की पुनर्बहाली, सभी कर्मचारियों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी लागू करना, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना, श्रमिकों को नियमानुसार वेतन और बोनस उपलब्ध करवाना तथा मूलभूत श्रमिक सुविधाएँ सुनिश्चित करना शामिल है।
लगातार बढ़ रहा जनसमर्थन: गिरल लिग्नाइट माइंस का यह आंदोलन अब पूरे क्षेत्र में बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है। लगातार दस दिनों से धरनास्थल पर लोगों की मौजूदगी और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी यह दर्शा रही है कि स्थानीय लोगों में कंपनी के प्रति भारी असंतोष है।
भीषण गर्मी और स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद आंदोलनकारियों का डटे रहना इस संघर्ष की गंभीरता को दर्शाता है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
आंदोलन के नौवें दिन अत्यधिक गर्मी के चलते शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद मौके पर चिकित्सकीय सहायता बुलानी पड़ी। डॉक्टरों ने धरनास्थल पर ही उनका प्राथमिक उपचार किया और ड्रिप लगाकर स्वास्थ्य जांच की। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद विधायक भाटी धरना स्थल से हटे नहीं और उन्होंने श्रमिकों के साथ आंदोलन जारी रखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि श्रमिकों और ग्रामीणों के अधिकारों की यह लड़ाई किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं पड़ने दी जाएगी।
भीषण गर्मी का असर अन्य आंदोलनकारियों पर भी दिखाई दिया। धरनास्थल पर बैठे कई श्रमिकों, बुजुर्ग ग्रामीणों और महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद चिकित्सा सहायता बुलानी पड़ी। मौके पर पहुँची मेडिकल टीम ने कई लोगों का उपचार किया, जबकि कई आंदोलनकारियों को ड्रिप लगानी पड़ी। लगातार तेज धूप, गर्म हवाओं और ऊँचे तापमान के कारण धरनास्थल पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ बढ़ती दिखाई दीं।
इसके बावजूद आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। श्रमिकों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने अधिकारों और रोजगार सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं और अब बिना समाधान आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
