नई दिल्ली/बाड़मेर। राजस्थान के सरहदी जिलों में पीने के पानी की समस्या और केंद्र सरकार की 'जल जीवन मिशन' (JJM) योजना में कथित धांधली का मुद्दा अब देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी लोकसभा में गूँज उठा है। बाड़मेर-जैसलमेर-बालोतरा से सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने शून्यकाल के दौरान सदन को बताया कि सीमावर्ती इलाकों में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है।
कागजों में हर घर जल, धरातल पर खाली नल
सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने सदन में कड़े तेवर अपनाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने 2019 में इस उम्मीद के साथ योजना शुरू की थी कि 2024 तक हर घर में नल से जल पहुंचेगा। लेकिन बाड़मेर और जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी इलाकों में हकीकत इसके उलट है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी रिकॉर्ड में काम को 70 से 80 फीसदी पूरा दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि पाइपलाइन तो बिछी हैं लेकिन उनमें आज तक पानी नहीं पहुँचा।
आज लोकसभा सदन में शून्यकाल के दौरान मैंने राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर, जैसलमेर एवं बालोतरा संसदीय क्षेत्र में जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों में अनियमितताओं के कारण उत्पन्न गंभीर पेयजल संकट की ओर सदन का ध्यान आकर्षित किया।
— Ummeda Ram Beniwal (@UmmedaRamBaytu) April 2, 2026
मैंने सदन को अवगत कराया कि वर्ष 2019 में… pic.twitter.com/8J0B1m0BHn
हजारों करोड़ के घोटाले का आरोप
बेनीवाल ने सीधे तौर पर भ्रष्ट तंत्र और अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जल जीवन मिशन में व्यापक अनियमितताएं बरती गई हैं। उन्होंने कहा कि बिना जल स्रोत (Water Source) सुनिश्चित किए ही आनन-फानन में पाइपलाइनें बिछा दी गईं, जो अब कई जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। अधिकारियों ने केवल अपनी कागजी प्रगति दिखाने के चक्कर में जनता के पैसे की बर्बादी की है।
ग्रामीणों पर पड़ रहा है आर्थिक बोझ
सांसद ने सदन को अवगत कराया कि भीषण गर्मी के दौर में स्थिति और भी विकराल हो जाती है। जब नलों में पानी नहीं आता, तो ग्रामीणों को महंगे दामों पर पानी के टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। आजादी के इतने दशकों बाद भी अगर सीमावर्ती क्षेत्र की जनता प्यासी है, तो यह सिस्टम की सबसे बड़ी विफलता है।
बेनीवाल की केंद्र सरकार से प्रमुख मांगें:
लोकसभा में अपनी बात रखते हुए सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने सरकार के सामने ये माँगें रखीं:
- जल जीवन मिशन के कार्यों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
- घोटाले में शामिल दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
- सिर्फ पाइपलाइन नहीं, बल्कि हर घर तक स्वच्छ पानी की नियमित सप्लाई सुनिश्चित की जाए।
- रेगिस्तानी क्षेत्रों की विषम परिस्थितियों को देखते हुए पेयजल योजनाओं की विशेष समीक्षा हो।
सांसद ने अंत में कहा कि सरकार एक तरफ 2047 तक 'विकसित भारत' का सपना दिखा रही है, लेकिन दूसरी तरफ बुनियादी जरूरत यानी 'पानी' के लिए भी जनता को संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह इसे केवल एक योजना न समझें, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा मानकर त्वरित समाधान करें।
