बाड़मेर

पचपदरा रिफाइनरी के अधूरे काम और सुरक्षा परीक्षणों के बीच जल्दबाजी को लेकर उठ रहे हैं सवाल !

20 अप्रैल को पचपदरा रिफाइनरी में हुई आगजनिक की घटना के बाद 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों से होने वाला रिफाइनरी लोकार्पण कार्यक्रम टल गया। इसके बाद से यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इसके साथ ही पचपदरा रिफाइनरी में लगी आग ने निर्माण और संचालन की टाइमिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिफाइनरी का दिसंबर 2025 तक 90.4% और 20 अप्रैल तक करीब 92% कार्य ही पूरा हुआ था, इसके बावजूद उद्घाटन की तैयारियां शुरू हो गई थीं। ऐसे में अधूरे काम और सुरक्षा परीक्षणों के बीच जल्दबाजी पर प्रश्न उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार 90% से 100% तक का ‘कमीशनिंग फेज’ सबसे संवेदनशील होता है। हादसे के समय यूनिट ट्रायल पर थी, कई यूनिट्स निर्माणाधीन थीं और प्रभावित हिस्सा पूरी तरह ऑपरेशनल रूप से सुरक्षित नहीं माना जा रहा था।

हाईटेक सिस्टम के बावजूद अर्ली वार्निंग का निष्क्रिय रहना और सेंसर फेल होना संदेह बढ़ा रहा है। एनआईए कंट्रोल रूम के आखिरी 48 घंटे की गहन जांच कर रही है।

इस हादसे से 1 जुलाई 2026 से प्रस्तावित उत्पादन प्रभावित हुआ है। प्रभावित यूनिट को दोबारा शुरू करने में 4-6 महीने लग सकते हैं, जिससे पहले ही बढ़ चुकी परियोजना लागत में और इजाफा तय माना जा रहा है।