शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक दिलचस्प क्षण तब देखने को मिला जब विजय निर्धारित शपथ-पत्र से आगे बोलने लगे। इस पर राज्यपाल अर्लेकर ने उन्हें बीच में टोकते हुए कहा कि वही पढ़ें जो लिखित रूप में दिया गया है। इसके बाद विजय ने दोबारा निर्धारित प्रारूप के अनुसार शपथ पूरी की।
समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के नेता मौजूद रहे। विजय के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही तमिलनाडु की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है।
विजय के साथ 9 मंत्रियों ने ली शपथ
मुख्यमंत्री विजय के साथ TVK के 9 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। इनमें एन आनंद, आधव अर्जुन, डॉ. केजी अरुणराज, केए सेंगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन, डॉ. टीके प्रभु और सेल्वी एस कीर्तना शामिल हैं।
दिलचस्प बात यह रही कि सरकार को समर्थन देने वाले सहयोगी दलों के किसी भी विधायक को पहले मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई। सभी मंत्री TVK के ही विधायक हैं। राजनीतिक जानकार इसे विजय का “कोर टीम मॉडल” मान रहे हैं, जिसमें शुरुआती दौर में पार्टी के भरोसेमंद चेहरों को प्राथमिकता दी गई है।
121 विधायकों के समर्थन से बनी सरकार
शनिवार को विजय ने राज्यपाल अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। उन्होंने TVK, कांग्रेस, CPI, CPM, VCK और IUML के कुल 121 विधायकों के समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपे। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया।
तमिलनाडु विधानसभा की 234 सीटों में बहुमत का आंकड़ा 118 है। TVK ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर राजनीतिक हलकों को चौंका दिया था। सहयोगी दलों के समर्थन के बाद विजय आराम से बहुमत के आंकड़े तक पहुंच गए।
1967 के बाद पहली बार बना गैर-द्रविड़ मुख्यमंत्री
तमिलनाडु की राजनीति में यह बदलाव ऐतिहासिक माना जा रहा है। वर्ष 1967 के बाद पहली बार किसी गैर-द्रविड़ दल का नेता मुख्यमंत्री बना है। इससे पहले 1963 से 1967 तक कांग्रेस नेता एम भक्तवत्सलम राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे।
करीब छह दशक तक द्रविड़ राजनीति के इर्द-गिर्द घूमने वाले तमिलनाडु में विजय की एंट्री को बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। फिल्मी लोकप्रियता को राजनीतिक समर्थन में बदलते हुए विजय ने बेहद कम समय में सत्ता तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बना दिया है।
