बाड़मेर 

जिले के राउमावि मेघवालों की बस्ती, सनावड़ा में शनिवार सुबह प्रार्थना सभा के बाद कुछ बच्चों की अचानक तबियत बिगड़ गई थी। देखते ही देखते 16 बच्चों के चेहरे और गर्दन पर तेज खुजली के साथ लाल चकत्ते उभर आए। गांव की पीएचसी पर डॉक्टर नहीं होने के कारण 13 बच्चों को तुरंत जिला अस्पताल रेफर किया गया। 



प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जलदाय विभाग की टीम को स्कूल बेचकर पानी की जांच के निर्देश दिए। जिसके चलते-चलते विभाग की टीम विद्यालय पहुंची और पानी के सैंपल लिए इसके साथ ही ग्रामीणों से बातचीत कर जानकारी ली। बच्चों के बीमार होने के इस मामले में प्रारंभिक जांच में फूड पॉइजनिंग की पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। 


अतिरिक्त जिला कलक्टर राजेंद्र सिंह चांदावत ने बताया कि जलदाय विभाग की टीम ने पानी के नमूने लिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ओपन वेल से सप्लाई हो रहे पानी का उपयोग ग्रामीणों, विद्यालय स्टाफ और अन्य विद्यार्थियों ने भी किया, लेकिन उनमें किसी प्रकार की समस्या सामने नहीं आई। ग्रामीणों ने भी इसकी पुष्टि की है। जांच के दौरान कुछ बच्चों की ओर से मित्तू के सेवन की बात सामने आई है, हालांकि काफी बच्चों में खुजली की शिकायत होने से बीमारी के वास्तविक कारण का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। खाद्य निरीक्षक की ओर से भी अलग से जांच की जा रही है। 

उन्होंने बताया कि बीमार बच्चों को उपचार के लिए बाड़मेर के राजकीय चिकित्सालय लाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया। जिला प्रशासन का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की गहन जांच की जा रही है और जल्दी ही वास्तविक कारण का पता लगाया जाएगा।