जानकारी के अनुसार, एक दिन पहले रामदेवरा क्षेत्र के एक तालाब में डूबने से एक मासूम की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद शव को पोकरण के राजकीय जिला अस्पताल लाया गया, जहां देर रात होने और परिजनों के दूर होने के कारण शव को पुलिस की निगरानी में मोर्चरी के डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखवा दिया गया।
रविवार सुबह जब परिजन पोस्टमॉर्टम और शव लेने के लिए मोर्चरी पहुंचे, तो वहां शव नहीं मिला। यह देख परिजनों के होश उड़ गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल स्टाफ से पूछताछ करने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।
सूचना मिलते ही रामदेवरा थाने से एएसआई रोहित पालीवाल पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। परिजनों के दबाव और पुलिस की मौजूदगी में मोर्चरी की गहन तलाशी ली गई। इस दौरान शव मोर्चरी के ही एक डीप फ्रीजर में दबा हुआ मिला।
बताया जा रहा है कि शव अत्यधिक फूल चुका था, जिसके कारण पहली नजर में उसकी पहचान करना मुश्किल हो गया था और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई कि शव गायब हो गया है। बाद में परिजनों ने ध्यान से देखकर शव की पहचान की, जिसके बाद माहौल शांत हुआ।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल की मोर्चरी प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने मामले में लापरवाही की जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
